नव वर्ष कि हार्दिक शुभकामना ... सम्वंत २०६९ देश , संस्कृति , ओर आप के परिवार के लिये शुभ व् मंगलमय हो
वर्ष प्रतिपदा विक्रम सम्वंत 2069 का प्रथम दिन " शक्ति उपासना का प्रारंभ " ओर भगत सिंह , सुखदेव ओर राजगुरु का बलिदान दिवस 23 मार्च ..एक दिन ...देश के आतितायियो सावधान ...इश्वर का इशारा अब भी समझ जाओ.....कुर्सी छोड़ो कि जनता आती हे
Friday, March 23, 2012
Monday, February 6, 2012
बस एक ही बात " डॉ . स्वामी को भारत रतन मिले "
अकेला चना भाड़ छोक सकता हे ॥ सीबीआई से लेकर सरकारी तन्त्र को सर्वोच्च न्यायालय से अपनी बात मनवाने वाले डॉ स्वामी को धन्यवाद .
Monday, February 7, 2011
बसंत.. अज्ञान से ज्ञान कि ओर एक कदम ॥
" या कुन्देन्दु तुषार हारधवला या शुभ्रवस्त्राव्रता , या वीणावर दंड मण्डितकरा या श्वेतपधमासना |
हस्ते स्फाटिकमालिकं विदधति पध्मासने सन्सिथ्तां | वन्दे तां पर्मैश्वरी भगवति बुधिप्रदां शारदाम॥ "
त्रि देवियों मे भगवती सरस्वती विधा ,ज्ञान ओर वाणी कि देवी हे तथा वाक़ , वाणी , गिरा, भाषा , शारदा , गो , सोम लता , वागदेवी , वागीशवरी आदि नामों पूजित हे | बसंत पंचमी के पर्व पर आप को नमन ओर सभी को बधाई |
हे भगवती इस बसंत पंचमी पर आप को पुकार रहा हूँ , इस भारत वर्ष पर अपनी कृपा करो | बचपन मे याद हे कि इस दिन पीले कपडे पहनने को मिलते थे , अपने स्कूल मे भी आप कि पूजा - पीले फूलो से कर आशीष मांगते थे , घर पर भी के तरह के मीठा - नमकीन पीले चावल बना करता था , आप कि पुत्री ये प्रकर्ति भी फूलो से पैड पोधो को धक् कर आप को नमन करती थी , ज्ञानी - अज्ञानी आप से बुद्धि - विवेक का आशीष माँगा करते थे |
पर पता ही नहीं चला कि आपने कब अपनी कृपा का हाथ इस भारत वर्ष से उठा लिया ओर तब से ही इस देश के बुरे दिन आ गये , देश के नेताओ के लिये आप कि पूजा सांप्रदायिक , तेजी से आगे बढ रही युवा पीढी के लिये पुरातन परंपरा , तथाकथित व् स्व घोषित बुधिजिवि वर्ग के लिये हिंदूवादी हो गई , प्रकर्ति को हम ने ही समेट दिया - जहा खेत थे वहा फैक्ट्री ओर पार्को कि जगहे बड़ी बड़ी बिल्डिंग बन गई , |
माँ , पर हम साधारण भारत वासी यों से क्या नाराजगी , हर तरफ से लुट पिट रहे इस आर्य व्रत के हर निवासी कि तरफ से मेरी प्राथना हे कि हमारे अज्ञान ओर जड़ता को दूर करने लायक ज्ञान का प्रकाश हमे दो | हम किताबी ओर रोटी जूगाडु ज्ञान के अंधकार से बाहर आ कर इस देश को तथा विव्श्व कि सबसे पुरानी मानव सभ्यता को एक नई दिशा दे पाये | एक एसा समाज बनाये जहा ज्ञान का मतलब समाज से कटना नहीं बल्कि समाज का खवैया बनना हो ओर जो समाज देश मे बढ़ ते भष्टाचार ओर सामाजिक उदासीनता पर अंकुश लगा पाये |
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हस्ते स्फाटिकमालिकं विदधति पध्मासने सन्सिथ्तां | वन्दे तां पर्मैश्वरी भगवति बुधिप्रदां शारदाम॥ "
त्रि देवियों मे भगवती सरस्वती विधा ,ज्ञान ओर वाणी कि देवी हे तथा वाक़ , वाणी , गिरा, भाषा , शारदा , गो , सोम लता , वागदेवी , वागीशवरी आदि नामों पूजित हे | बसंत पंचमी के पर्व पर आप को नमन ओर सभी को बधाई |
हे भगवती इस बसंत पंचमी पर आप को पुकार रहा हूँ , इस भारत वर्ष पर अपनी कृपा करो | बचपन मे याद हे कि इस दिन पीले कपडे पहनने को मिलते थे , अपने स्कूल मे भी आप कि पूजा - पीले फूलो से कर आशीष मांगते थे , घर पर भी के तरह के मीठा - नमकीन पीले चावल बना करता था , आप कि पुत्री ये प्रकर्ति भी फूलो से पैड पोधो को धक् कर आप को नमन करती थी , ज्ञानी - अज्ञानी आप से बुद्धि - विवेक का आशीष माँगा करते थे |
पर पता ही नहीं चला कि आपने कब अपनी कृपा का हाथ इस भारत वर्ष से उठा लिया ओर तब से ही इस देश के बुरे दिन आ गये , देश के नेताओ के लिये आप कि पूजा सांप्रदायिक , तेजी से आगे बढ रही युवा पीढी के लिये पुरातन परंपरा , तथाकथित व् स्व घोषित बुधिजिवि वर्ग के लिये हिंदूवादी हो गई , प्रकर्ति को हम ने ही समेट दिया - जहा खेत थे वहा फैक्ट्री ओर पार्को कि जगहे बड़ी बड़ी बिल्डिंग बन गई , |
माँ , पर हम साधारण भारत वासी यों से क्या नाराजगी , हर तरफ से लुट पिट रहे इस आर्य व्रत के हर निवासी कि तरफ से मेरी प्राथना हे कि हमारे अज्ञान ओर जड़ता को दूर करने लायक ज्ञान का प्रकाश हमे दो | हम किताबी ओर रोटी जूगाडु ज्ञान के अंधकार से बाहर आ कर इस देश को तथा विव्श्व कि सबसे पुरानी मानव सभ्यता को एक नई दिशा दे पाये | एक एसा समाज बनाये जहा ज्ञान का मतलब समाज से कटना नहीं बल्कि समाज का खवैया बनना हो ओर जो समाज देश मे बढ़ ते भष्टाचार ओर सामाजिक उदासीनता पर अंकुश लगा पाये |
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Wednesday, September 9, 2009
अब धर्म निरपैक्छ्ता को खतरा नहीं
महाराष्ट्र के सांगली जिले मे गणेश जी विसर्जन नहीं हो पा रहा है मूर्तिया खंडित की जा रही है , मिराज ओर जिले के दूसरे हिस्सों मे सांप्रदायिक तनाव है हिन्दू आस्था पर चोट की जा रही है पर कही कोई खबर नहीं कोई विरोध नहीं . सांप्रदायिक तनाव का कारण है की किसी गणेश पंडाल मे शिवाजी महाराज के हाथो से अफज़ल खान के वध की प्रदर्शनी लगी हुई थी , ये अफज़ल वर्तमान का अफज़ल नहीं शिवाजी के समय का है

महाराष्ट्र मे इतना सुब कुछ हो गया पर कही कोई हल्ला नहीं , गोपीनाथ मुंडे को एयर पोर्ट पर रोकने पर हुऐ हल्ले पर जरूर एक दिन खबर दी गई पर कही के उल्लेख नहीं था की सांप्रदायिक तनाव के चलते गणेश विसर्जन ही रुका हुआ है , ओर देखिये विवाद का विषय भी इतिहास की एक सत्य घटना . अब शिवाजी महाराज पर भी लोगो को आपति होने लगी ओर आपति की हद भी इतनी की हिन्दू आस्था पर ही चोट कर दी , गणेश मूर्तियों पर पत्थर उछाले गये

हिन्दू धर्म पर चोट से इस देश की धर्म निरपैक्छ्ता को बल मिलता है तभी तो न मीडिया मे ओर न ही तथाकथित धर्म निर्पैक्छ्ता के तैकैदारो को कोई परेशानी हुई , इन से मुझे कोई उम्मीद भी नहीं है पर भारत का आम आदमी - ये कब तक सोता रहेगा , महाराष्ट्र मे चुनाव है इस तनाव को भी हिन्दू संगठनो से जोड़ दिया गया , गणेश मंडलों को शिवाजी व् अफजल का पोस्टर लगाने पर नोटिस दिया गया , मुस्लिम वोटो के लिये शिवाजी द्वारा अफज़ल वध के पोस्टर हटा दिये गये ओर मूर्तियों पर पथराव को पुलिस देखती रही ताज्जुब कही कोई खबर ही नहीं
क्या हिन्दू की बात करने से इस देश की शांति भंग हो जाती है , सोचिये जरा यदि कुछ ऐसा ही किसी मुस्लिम या ईसाई आस्था पर हुआ होता तो देश की संसद से लेकर मीडिया ओर सड़क छाप धर्म निर्पैक्छ्ता के तैकैदारो का क्या हाल होता . ये केवल हिन्दू या मुस्लिम की बात नहीं है , सही ओर गलत मे अंतर की बात है , अफज़ल खान जैसे लोगो मे अपना नेत्रत्व तलाश करने की बात है , फिर भी इस देश मे अल्पसंख्यक "खतरे" मे है
Sunday, August 23, 2009
"मेरे घ्रर आई एक नन्ही परी"

मेरी बिटिया , बहुत इंतजार कराया है इसने पर कहते है ना कि इंतजार का फल मीठा होता है , इसके नन्हे कदमों ने पूरे परिवार मे खुशिया बिखेर दी है , बिटिया के रूप मे लक्ष्मी जो आई है ( इसकी पडदादी ने इसको इसी नाम से पुकारा है )
Thursday, August 13, 2009
तिरंगे कि दूर्दशा

(ये फोटो दिल्ली जोधपुर इंटरसिटी ट्रेन मे लिया गया है , ओर ज़रा खिड़की के पास टके थैले को देखिये , जी हाँ ये तिरंगा है हमारा राष्ट्रीय ध्वज )

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे कि इस दशा पर आंसू आ रहे है उस से ज्यादा इस उन्नत ओर आगे बढ़ रहे देश के हालात पर , लाखों शहीदों कि कुर्बानियों पर मिली इस आज़ादी मे हम अपने लोगों को मूलभूत न तो बाते बता पाये ओर न ही मूलभूत सुविधा - शिक्छा दे पाये , मुझे इस ओरत से कोई नाराजगी नहीं है उस को तो तिरंगे ओर दूसरे कपडे मे कोई अंतर ही नहीं मालूम , पर अफ़सोस है ट्रेन के टीटी , रेलवे पुलिस के जवान ओर सामने कि बर्थ पर बैठे भी पढे लिखे लोगों पर जो तिरंगे कि दुर्दशा को देख उसे एक प्रदर्शनी बनाये हुई थे , किसी ने उस अनपढ़ महिला को टोका भी नहीं , जैसे ही उस को बताया उसने इस को खली कर दूसरे थैले मे रख भी लिया
पर यदि आज़ादी के 60 साल बाद भी हमारी जनता इस से अनभिज्ञ है तो कोन दोषी है , देश का नेत्रत्व करने वाले नेता - अफसर या आप ओर हम , हम चाँद ओर मंगल , तेजी से बढती अर्थव्यवस्था , कि बात करते है पर इस फोटो को देख कर सोचिये जरा ,कि क्या हम वाकई आगे बढ़ रहे है , क्या हम ज्यादा ही आजाद हो गये है या हम आज़ादी का पर्व मनाने का हक रहते है ??
" स्वाधीनता दिवस कि सभी को शुभकामना ओर शहीदों को नमन , साथ ही भरोसा कि देश शहीदों के सपने वाला देश जरूर बनेगा "
Tuesday, August 11, 2009
"राष्ट्रीय राजमार्ग पर आप का स्वागत है "
मार्ग भी कई तरह के होते है न , गाँव की पगडण्डी -सिंगल सड़क - राज्य सरकार के राजमार्ग ओर राष्ट्रीय राजमार्ग वैसे ही जैसे गाँव - क़स्बा -जिला ओर राजधानी , अब देश की वर्तमान स्थिति की चलते गाँव - क़स्बा -जिला मे सुविधाओ की तो उम्मीद छोड़ दीजिये पर राजधानी मे तो कुछ उम्मीद कर ही सकते है , पर वहां भी हाल बेहाल मिले तब ? राष्ट्रीय राजमार्ग पर उम्मीद की जा सकती है बढ़िया सड़क कि , वैसे सड़क है तो उस मे गड्ढा तो होगा ही , कही कही गड्ढो मे सड़क भी , लालू भी कभी पटना की सडको को ....के गालो की तरह बनाना चाहते थे पर बात केवल बात बन कर रह गई
अभी NH 8 पर रेवाडी से जयपुर जाना हुआ , राष्ट्रीय राजमार्ग की सुविधा के उपभोग के लिये आने जाने के लिये करीब 250 रुपे का टोल टैक्स भी दिया , पर गड्ढो से बचने के लिये अपनी कार की स्त्त्येरिंग को बार बार घुमाता ही रहा , नजर आस पास की गाडियों के आलावा सड़क के संभावित गड्ढो पर भी टिकी रही , जाते वक्त तो हालात को फिर भी कुछ टीक थे है पर जयपुर से वापसी के वक्त " है भगवान ". लग रहा था की किसी गाँव की सड़क पर है , वैसे गावों कि सड़क इस ज्यादा अच्छी है , इतने भारी टोल टैक्स का मतलब केवल सरकारी डंडे से वसूली लगा ,जयपुर से दिल्ली राजमार्ग दो राजधानियों को जोड़ने वाला - दो पर्यटक राजधानियों को जोड़ने वाला मार्ग है साल मे लाखों देशी विदेशी पर्यटक इस मार्ग पर सफ़र करते है .. . पर इस की हालात देख कर बहुत दुःख हुआ .. कहते है सड़क देश का आइना है , राजमार्ग की हालात देख इस आइने से क्या देखे समझ नहीं आता 
जान का क्या है भाई जल्दी है , ऊपर की फोटो भी राष्ट्रीय राजमार्ग की ही है - करीब 100 की स्पीड पर चल रही इस जीप मे ये लोग पीछे लटक रहे है , यात्रियों को न तो अपनी सुरक्छा की चिंता है ओर न ही जीप चालको को पुलिस का भय .. ओर न ही पुलिस को अपने काम की याद .
वैसे राजमार्ग पर लगा बोर्ड अब भी कह रहा है "राष्ट्रीय राजमार्ग पर आप का स्वागत है "
अभी NH 8 पर रेवाडी से जयपुर जाना हुआ , राष्ट्रीय राजमार्ग की सुविधा के उपभोग के लिये आने जाने के लिये करीब 250 रुपे का टोल टैक्स भी दिया , पर गड्ढो से बचने के लिये अपनी कार की स्त्त्येरिंग को बार बार घुमाता ही रहा , नजर आस पास की गाडियों के आलावा सड़क के संभावित गड्ढो पर भी टिकी रही , जाते वक्त तो हालात को फिर भी कुछ टीक थे है पर जयपुर से वापसी के वक्त " है भगवान ". लग रहा था की किसी गाँव की सड़क पर है , वैसे गावों कि सड़क इस ज्यादा अच्छी है , इतने भारी टोल टैक्स का मतलब केवल सरकारी डंडे से वसूली लगा ,जयपुर से दिल्ली राजमार्ग दो राजधानियों को जोड़ने वाला - दो पर्यटक राजधानियों को जोड़ने वाला मार्ग है साल मे लाखों देशी विदेशी पर्यटक इस मार्ग पर सफ़र करते है .. . पर इस की हालात देख कर बहुत दुःख हुआ .. कहते है सड़क देश का आइना है , राजमार्ग की हालात देख इस आइने से क्या देखे समझ नहीं आता

जान का क्या है भाई जल्दी है , ऊपर की फोटो भी राष्ट्रीय राजमार्ग की ही है - करीब 100 की स्पीड पर चल रही इस जीप मे ये लोग पीछे लटक रहे है , यात्रियों को न तो अपनी सुरक्छा की चिंता है ओर न ही जीप चालको को पुलिस का भय .. ओर न ही पुलिस को अपने काम की याद .
वैसे राजमार्ग पर लगा बोर्ड अब भी कह रहा है "राष्ट्रीय राजमार्ग पर आप का स्वागत है "
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